मेरे दिल का मसला, हालात-ए-मुश्किल में हैं..
पोशीदा सब राज़ मेरे, सरे-महफ़िल में हैं..।
किस किस मोड़ पे, हम खुद को संभाले आख़िर..
चलो अब इत्मीनान हुआ, नाम हमारा शुमार-ए-बिस्मिल में है..।
कभी-कभी दौर-ए-हयात गुज़रता है इस तरहा..
कि मालूम नहीं सुकूं राहों में हैं, कि मन्ज़िल में है..।
तू तो न मिज़ाज़-ए-सुलूक, ग़ैरों की तरह निभा मुझसे..
धुआँ उससे कुछ जुदा है, आग जो तेरे दिल में है..।
क्या बचाऊँ अब दामन वक्त-ए-लौ-ए-आतिश से..
उससे ज़ियादा न होगा हासिल, जो लिख्हा मेरे मुस्तक़बिल में है..।
पवन कुमार "क्षितिज"


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
The Flower of Word by Vedvyas Mishra







