तू मुझे इतना चाहता रहा, मैं तेरा प्यार समझ न पाई,
तेरी होकर भी तेरी बन न सकी, यही मेरी सबसे बड़ी परछाई।
तेरी आज़ादी को मैंने बोझ समझ लिया,
तेरे होते हुए भी खुद को तुझसे दूर कर लिया।
तू मना करता रहा, मैं मान न सकी,
तेरे चाहने जैसा खुद को पहचान न सकी।
तू जब डाँटता है तो दिल को सुकून मिलता है,
पर तेरी खामोशी मेरा दिल हर पल छलनी करती है।
तू चुप रहे, ये तुझ पर जँचता नहीं,
तेरी बातें बिना मेरा मन लगता नहीं।
गाली दे ले, लड़ ले, पर मुझसे बात तो कर,
तेरी बेरुख़ी से टूट जाता है मेरा हर एक सब्र।
गलती मेरी थी, ये अब मान लिया,
तेरे दिल को मैंने अनजाने में दुख पहुँचा दिया।
तेरी छाँव में फिर से जगह दे मुझे,
अपने प्यार की पनाह में सजा दे मुझे।
तेरी नाराज़गी सह नहीं पाती हूँ,
तेरे बिना खुद को अधूरा पाती हूँ।
तेरा होना मेरी खुशियों की वजह है,
तेरा मुँह फेर लेना मेरी सबसे बड़ी सज़ा है।
तुझसे खुशी मिलती थी, कहीं और ढूँढती रही,
तेरे प्यार को समझने में देर करती रही।
तू हर बार मेरे लिए झुकता रहा,
और मैं ही थी जो तुझे समझ न सकी, भटकती रही।
माफ़ कर दे अगर दिल दुखाया है,
तेरे प्यार को मैंने देर से अपनाया है।
एक आख़िरी मौका दे दे मुझे,
तेरी पनाह में फिर से रहने दे मुझे।
मैं भटक गई थी रास्तों के बीच,
अब लौट आई हूँ तेरे पास पूरी उम्मीद के साथ करीब।


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
The Flower of Word by Vedvyas Mishra







