निज शिष्य में ज्ञान की रोशनी भरने जो प्रतिफल मोम की तरह पिघलता है
वास्तव में वहीं तो शिक्षक बनता है
भेद अच्छे और बुरे का पहचानने की क्षमता निज शिष्य में जो भरता है
वास्तव में वही तो शिक्षक बनता है
सीख कर्तव्य पालन और अनुशासन की तुम्हारी रगों में जो प्रतिपल भरता है
वास्तव में वहीं तो शिक्षक बनता है
अनसुलझे कुछ सवाल तुम्हारे सुलझाने की जो क्षमता रखता है
वास्तव में वहीं तो तो शिक्षक बनता है
ईर्ष्या और द्वेष भाव भीतर तुम्हारे पनपने ना पाए ऐसी चेष्टा जो हर पल करता है वास्तव में वही तो शिक्षक बनता है
आत्मविश्वास और आत्म सम्मान के गुण जो निज शिष्य भरता है
वास्तव में वही तो शिक्षक बनता है
एक शिक्षक की अपने शिष्य से क्या उम्मीद होती है उसे मैं आगे की के पंक्ति में कहती हूं
जानते हैं हम सभी यहां सामने बैठे शिष्य हमारे एक दिन ज्ञान का प्रज्वल दीप बनकर हमसे विदा ले जाएंगे
और चुनौती से भर समाज की ओर अपने कदम बढ़ाएंगे जहां बाधाओं का अंबार होगा
आत्मविश्वास के अलावा ना कोई साथी संग होगा तब
हमारी कहीं हर सीख का अनुकरण कर बाधाओं से दो हाथ कर लेना
निसंदेह अपने उद्देश्य को तुम पाओगे उस दिन सफलता तुम्हें मिलेगी
और सफल हम कहलाएंगे !
✍️ अर्पिता पाण्डेय


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
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