मेरी कविताएँ
कुछ ऐसी ही जैसे तुम,
घर के कामों में
व्यस्त रहती हो।
बनना-सँवरना
छोड़कर,
जिंदगी को पटरी पर
जमाए रखने में
व्यस्त रहती हो।
तुम्हारी सुंदरता
फिर महँगे
परिधानों की
मोहताज नहीं रह जाती।
अलंकार भी
ज़रूरी नहीं रह जाते।
क्योंकि यहाँ किसी को
रिझाना नहीं है,
सच का सामना
करना है
जिससे घिरी है
जिंदगी हर पल।
मुझे तुम वैसी ही
पसंद हो, जैसी हो,
क्योंकि तुम मेरी
कविताओं जैसी हो
जो किसी को खुश
करने के लिए नहीं,
जिंदगी को एक
आवाज़ देने के लिए
लिखी गई हैं।


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
The Flower of Word by Vedvyas Mishra







