भूख से बिलखती,
सूखी अंतड़ियों की,मौन चीख
उन्हें क्या सुनाना,जो
सब कुछ सुनकर भी
बहरा बनने को लाचार है,
घाव के अंदर से
निकलती रक्त में
चमकती हुई, पुकारती हुई
असहनीय वेदना को
उन्हें क्या दिखाना,जो
दो सजीव आंखें होकर भी
अंधा बनने को लाचार है
बस्ती में, लोगों को
चंदा की चांदनी मुफ्त
पेड़ों से हवा मुफ्त
कुओं सरोवरों से जल मुफ्त
खेतों से अन्न मुफ्त,
फिर, मुफ्तखोरी की
महामारी फैलाने का
एहसास उन्हें क्या कराना,जो
समझदार होकर भी
नासमझ बनने को लाचार है,
नफ़रत की राजनीति
करनें वाले, आत्माओं को
चीख चीखकर क्या बताना
जिनके घर के आंगन में ही
नफ़रत का बाजार है।
सर्वाधिकार अधीन है


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
The Flower of Word by Vedvyas Mishra







