तम्मना उभरती बिखरती अन्दर कुछ कहती।
साँस चढ़ती उतरती उनके साथ रहना चाहती।।
मृत्यु आने से पहले कुछ देर के लिए ही सही।
जीवन को फिर से बाहों में भर लेना चाहती।।
गोद में सिर रखकर आँखें बन्द होने से पहले।
खुली आँखों से तुम्हारी आँखें देखना चाहती।।
कितना सुहाना वह वक्त होगा कब्र के पहले।
हसीन यादो को फिर तरोताजा करना चाहती।।
मोहब्बत समझेगा वही जिसने की हो 'उपदेश'।
तुम्हारे जुल्मों की वादियों में डूब जाना चाहती।।
- उपदेश कुमार शाक्यावार 'उपदेश'
गाजियाबाद


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
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