उसने अपनी मर्ज़ियां चलाई,
कभी मेरे मन का करने न दिया।
मुझे हरा भरा रखा उसने,
कभी मेरे ज़ख्मों को भरने न दिया।
मैं चीखता रहा - चिल्लाता रहा मग़र,
उसने तड़पाकर ज़िन्दा रक्खा मुझे,
कभी मरने न दिया..।।
कमलकांत घिरी ✍️

Dastan-E-Shayara By Reena Kumari Prajapat

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The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
उसने अपनी मर्ज़ियां चलाई,
कभी मेरे मन का करने न दिया।
मुझे हरा भरा रखा उसने,
कभी मेरे ज़ख्मों को भरने न दिया।
मैं चीखता रहा - चिल्लाता रहा मग़र,
उसने तड़पाकर ज़िन्दा रक्खा मुझे,
कभी मरने न दिया..।।
कमलकांत घिरी ✍️
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