जग की अपनी दृष्टि है, सबका अपना न्याय।
एक हृदय में प्रेम हूँ, दूजे में अन्याय॥
सबको अच्छा लग सकूँ, इतना कहाँ विधान।
अपने हिस्से सत्य है, जग के अपने मान॥
दोष पराए ढूँढ़ते, मन देखे न निज दोष।
एक ही घटना में छिपे, कितने भिन्न परिप्रेक्ष्य॥
मन का साक्षी मौन है, जग का अलग हिसाब।
किसकी कथा में कौन है, दोषी—किसका ख़्वाब॥
सबकी स्वीकृति छोड़कर, मन को रखना साफ़।
कर्म रहें निष्कपट यदि, मौन स्वयं इंसाफ़॥
डॉ. अखिलेश श्रीवास्तव


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
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