आँखों के तलक में आ जाए ऐसा पल,
उसमें आपका मिलना हो तो क्या बात हो जाए,
आपसे मिला एहसास दिल में खो जाएं,
जब तक ना देखूं आपको इक बार,
पलकों का उठना ना हो पाए,
अपने लफ़्ज़ों को समझाया है कि वो आप के ही ना हो जाए,
ख्वाब उन्हें बस आपका ही आता है,
आप बिना वो अहनाद ध्वनि भी ना कर पाए,
ये आज जो खामोशी है ये आप की दी हुई है,
दिल जिसमें धड़कन आपके आने से बेचैन होती है,
मैं कांप जाता हूँ कि दिल को इनसे प्यार का डर है,
जब राहों में हम इंतजार को खड़ा देखते हैं,
तो वो देखकर आप के लिए पूछ लेता है,
भले ही वो मेरा इंतजार ना करें,
पर मेरे पल पल को आपके लिए गवां रहा है,
मैं जानता हूं कि मैं जिंदगी जीने की जगह एक नया दरवाजा खोल रहा हूं,
जो प्रेम का है,
प्रेम जीवन का हिस्सा नहीं बल्कि खुद जीवन से कईं गुना विशाल है,
जहाँ मैं खुद के जहां, जिंदगी और खुद को खो सकता हूं,
जहाँ शायद कफ़न भी ओढ़ कर मैं जिंदा रहूंगा,
जहाँ मौत भी मुझे ले जाना चाहेगी,
जहाँ इतना अजनबी हो जाऊंगा कि,
जहां खुद को बलाए मैं खुद लगा दूंगा,
और इस जगह में तुम्हें मैं अपने साथ देखना चाहता हूँ,
अजीब भी अपने नसीब मुझे नहीं रखना चाहेगा,
शायद इस अथाह प्रेम में कोई प्रेम करना नहीं चाहेगा,
लेकिन इस धरातल के जहां में आँसू भी बिक रहे हैं,
कला हो रही है, किरदार बँट रहे हैं, तुम यहां भी कैसे रहोगी,
ये बताओ प्रेम करोगी,
या यहाँ बँटते बँटते चलती रहोगी,
अंत मौत का है,
शरीर यहाँ एक क्षण बाद नहीं मिलेगा वो भी अगले क्षण में,
यहाँ या तो तुम किसी को जलाओगी,
या कोई तुम्हें जलाएगा,
यहाँ का दस्तूर निश्चित है,
तुम पूरी तो नहीं रह पाओगी यहाँ,
प्रेम स्वयं कितना रखेगा,
वो उस दरवाजे में जाकर देखें,
और मौत शेष से सब विशेष ले गई,
जीवन अपना कर्म उलझन सरहद में रखना चाहेगा,
तुम खुद को प्रकट करने के लिए समय लेना चाहोगी,
समय तुम्हें एक ही दिशा जानें को कहेगा,
तब तुम एक में ही सफल कहलाओगी,
जीवन के क्षेत्र में सफलता सिर्फ एक क्षण है,
और संसार बहुत प्रभावी है, तुमसे एक क्षण ही कभी भी छिन लेगा,
खुदा खुद गायब है वही तुम्हारे किसी ना किसी क्षण में तुम्हें भी गायब कर देगा,
संसार, समय और आवश्यकता पर कार्य करता है,
समय बढ़ेगा आवश्यकता कमजोर होगी,
तब हर प्राणी में द्वंद्व होगा,
कमी दिखेगी, तुम सुधार करोगे,
पर पुराने आँसुओं को बुरा लगेगा,
विरोध होगा,
जंग होगी,
फिर कुछ क्षण से क्षण सही रहेगा,
फिर समय बढ़ेगा,
हाथों से सब लुटा दोगे,
हाथ में रहेगा कुछ नहीं,
अंततः तुम शेष भी चले जाओगे,
कुछ नहीं ऐसा है जो जरूरी है,
बस तुम थे,
तुम हो बस इतना काफी है।।
- ललित दाधीच।


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
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