ये ज़मीन बारिश को सजदे हज़ार करती।
कली खिलने को सुबह का इंतजार करती।।
श्रद्धा पहले से रही अब भक्ति का कमाल।
आस्था गहरी रही वो इबादत जरूर करती।।
स्नेह को भरोसे का साथ जब से मिल गया।
कहते नही थकती वो रिश्ता गुलज़ार करती।।
अपने जैसे का साथ मिलने से 'उपदेश' का।
दर्द फ़ना हो जाता वो चाह्त में प्यार करती।।
- उपदेश कुमार शाक्यावार 'उपदेश'
गाजियाबाद


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
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