गुजारिश पर किसी की,महफिल-ए-जाम हो गई,
जरा सा हम क्या बहक गये, शराब बदनाम हो गई।
किसी बोतल से निकलकर, पैमाने से छलकने लगी,
हमने जरा हलक से उतार दी, सुहानी शाम हो गई।
हरी हरी बोतलें,पर, जाम था नारंगी नारंगी बेशक,
उसने होंठों से लगाई तो, गुलाबी गुलफाम हो गई।
दिल की हसरतों को, हमने, सम्हाल कर रखी थी,
दोस्तों ने बताया,सारी की सारी,खुले आम हो गई।
यार,कसम से, हमने, सिर्फ,दो ही घूंट पी थी,उस दिन
लोगों की नजर में हमारी, शख्शियत बदनाम हो गई।।
सर्वाधिकार अधीन है


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
The Flower of Word by Vedvyas Mishra







