"सपनों की गहराई"
""सपने भूल रहे हैं उनकी हकीकत मिट सकती है,
मेरी हकीकत में,,
मैं क्या चाहता हूँ क्या करता हूँ सपने मुझे दिखाते हैं,
असल में हकीकत में करूँ तो वो भी सपने नज़र आते हैं,
मेरे भीतर मुझे अनाम कर, सब जगह उठाते गिराते जाते हैं,
तब हकीकत में करना हो तो मात से मौत में धकेल दी जाती हैं,
अब अच्छा और नसीब का सरगम रखा सपने ने,
हकीकत में तो हजारों हाथ मुझे खरोंच और कुतर कुतर के चले जाते हैं,
सपने तू मुझे तो बुलाती है थकाकर और सुलाकर,
बोलने भी न देती, ना वहां से कुछ अच्छा ले जाने देती है,
लेकिन तू आ सपने हकीकत में,
तुझे तेरा पसीना और यहाँ पड़ा बारूद का ढ़ेर दिखाता हूँ,
तब तुझे तेरे ही सपने में मेरी हकीकत से अनाथ कर दूंगा,
अपने ही सपने की तू हकीकत बन जायेगी,
हम जैसे दिल जले को अपना शिकार नहीं बना पाएगी,
भूलने पर हक़ीक़त तुझे हैरत कर जायेगी,
तब सपनों की सतह खाली हो जायेगी।""
- ललित दाधीच


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
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