माँ कई दिनों से चुप बैठी, साहब, आप व्यस्त हैं,
देश-दुनिया ठीक कर रहे, साहब, आप व्यस्त हैं।
पिता की आँखों में उतरा थोड़ा-सा जो इंतज़ार,
उसे कल पर टाल रहे हैं, साहब, आप व्यस्त हैं।
घर में सबकी ख़ैर पूछना अब पुरानी बात हुई,
ऑनलाइन जग जीत रहे हैं, साहब, आप व्यस्त हैं।
बेटा कब से चित्र बनाकर दरवाज़े पर देख रहा,
बैठक में ही अटके बैठे, साहब, आप व्यस्त हैं।
पत्नी ने बस इतना पूछा—“कैसा था आज का दिन?”
मोबाइल को देख रहे हैं, साहब, आप व्यस्त हैं।
दोस्त पुराने याद दिलाएँ बचपन वाली शामें तो,
“फिर कभी” कह छूट रहे हैं, साहब, आप व्यस्त हैं।
अपनों के संग बैठ सकें, इतना भी अवकाश नहीं,
लेकिन घंटे स्क्रॉल कर रहे, साहब, आप व्यस्त हैं।
धड़कन, नींद, सेहत, रिश्ते सब धीरे-धीरे रूठ गए,
लक्ष्य नए निर्धारित हैं, साहब, आप व्यस्त हैं।
जीवन जब हिसाब माँगेगा एक दिवस संध्या के समय,
क्या उत्तर तब दे पाएँगे? साहब, आप व्यस्त हैं।
‘शारदा’ ने इतना जाना इस दौड़ते परिवेश में—
जीना बाद में सीखेंगे, साहब, आप व्यस्त हैं।


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
The Flower of Word by Vedvyas Mishra







