मेरी प्यास का, इक ख़त सागर के नाम..
सहरा में खड़ा है दरख़्त, सागर के नाम..।
ज़माने को मेरे आंसू, कभी दिखे ही नहीं..
अब एक बूंद बची है, फ़क़त सागर के नाम..।
नदियां भी अपनी, दरियादिली से कर गई हैं..
चश्म-ए-बे-ताब की फ़ितरत, सागर के नाम..।
वो जो मिटाए से भी, किसी तरह मिटी नहीं..
वो दाग–ए–दिल–ए–हसरत, सागर के नाम..।
मेरे हयात–ए–चमन को, बहारों का इंतज़ार ही रह गया..
कुदरत भी कर गई, अब्र-ए-रहमत सागर के नाम..।
पवन कुमार "क्षितिज"


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
The Flower of Word by Vedvyas Mishra







