तुम्हें क्या लगता है,
क्यों तुम्हें ही लगता है,
क्या सिर्फ तुम्हें ही लगता है,
तो बस रुकों,
देखते हैं सब्र पर क्या छलकता है।।
- ललित दाधीच।।

Dastan-E-Shayara By Reena Kumari Prajapat

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तुम्हें क्या लगता है,
क्यों तुम्हें ही लगता है,
क्या सिर्फ तुम्हें ही लगता है,
तो बस रुकों,
देखते हैं सब्र पर क्या छलकता है।।
- ललित दाधीच।।
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