साँसे बड़ी बोझिल लगती हैं मैं घुटन से मर न जाऊँ
तुम आके संभाल लो कहीं तन्हाई में गुज़र न जाऊँ
दुःख,पीड़ा,दर्द सब तुझें न बताऊ तो किधर जाऊँ
तुझसें अग़र कुछ छुपाऊँ तो मेरी जान मर न जाऊँ
मुझे इश्क़ की दुहाई न दे,इसने दिल क़ो मार दिया
ज़िस्मि खोल में भी मैं अना गिराऊँ तो मर न जाऊँ
माना बहुत पुराना हैं पर इकलौता एक ठिकाना हैं
दीवारे ढह चुकी छत क़ो ग़र न थामु तो मर न जाऊँ
तेरे दर-ओ-दहलीज़ से बंधा दिल मेरा फ़िक्र न कर
ग़र तुझसे दूर जाऊ तो फिर मेरी जान मर न जाऊँ
मुहब्बत में शक़ नहीं मेरी जान तू तो मेरा ईमान हैं
तेरी मुहब्बत क़ो ग़र आज़माऊँ तो फिर मर न जाऊँ
कृष्णा क़ो फ़क़त तेरा सहारा हैं अपना खयाल रख
तुझें कुछ हुआ तो फिर मेरी जान सच में मर न जाऊँ
-कृष्णा शर्मा


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
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