जो ख़िलाफ़ थी मेरे, उनकी वो बात भी रख ली..
जो कुछ ज़रूरी न थी, वो एहतियात भी रख ली..।
अबके बहारों के इरादे कुछ बदले हुए से लगते हैं..
हमने तभी तो ज़ेहन में, कोई बरसात भी रख ली..।
शब-ओ-सितारे सहर में, जो चले अपनी राह तो..
रात ने सितारों की कोई, हिदायत भी रख ली..।
वो कहते थे, अगली दफ़ा दिल की कुछ कहेंगे..
वो न आए तो, हमने वो मुलकात भी रख ली..
बहुत इंतजार था कि, उनका फैसला आयेगा..
वो बेवफ़ा थे, मुहब्बत की शुरुआत भी रख ली..।
पवन कुमार "क्षितिज"


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
The Flower of Word by Vedvyas Mishra







