कुछ इंतज़ार अधूरा, कुछ इजहार अधूरा..
ज़माने का दस्तूर था, सो रहा प्यार अधूरा..।
सुबह के भाव जुदा थे, शाम के भाव अलग..
धोखा-ए-रिवाज़ के बग़ैर, था बाज़ार अधूरा..।
उनके खयालों से हम, जाने थे निकले कैसे..
कभी पूरा सोचा, कभी छोड़ा विचार अधूरा..।
हमसे बिछुड़ के फिर कभी, वो नूर ना आया..
फूलों की सेज पर था, चेहरे का निखार अधूरा..
तअल्लुक़ की कोई बात है, मेरे ज़ेहन में दोस्तो..
कहता, मगर अभी है, उसका सरोकार अधूरा..।
लिखना था मुझ पर भी, इक तफ़सरा मुझको..
मगर वक्त ने रखा, सदा मेरा किरदार अधूरा..।
हाथों में हाथ लिए सफर पे निकल तो गए मगर..
हर दफा रहा बस, मुहब्बत पर ए'तिबार अधूरा..।
पवन कुमार "क्षितिज"


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
The Flower of Word by Vedvyas Mishra







