हमने जिसे अपना समझा, वही बेगाना निकला,जिसे दिल में रखा, वही दिल का अफ़साना निकला।
हमने तो उम्र भर उसकी खुशी माँगी थी,
वो मेरे हिस्से में बस दर्द का नज़राना निकला।
उसकी हर बात को सच मानकर जीते रहे,
जब पर्दा उठा तो हर वादा बहाना निकला।
मैंने उसके लिए दुनिया से किनारा कर लिया,वो किसी और का होकर भी मुस्कुराना निकला।
हमने चाहा था जिसे आख़िरी साँस तक अपना,वो तो मौसम था, बदलना ही जिसका फ़साना निकला।
अब शिकायत भी करें तो किससे करें हम,
जिसे कातिल समझा, वही अपना पुराना निकला।
अजीब था उसका इश्क़ भी, अजीब उसका फ़ैसला, दिल हमारा तोड़ा और इल्ज़ाम भी हमारा निकला।
अब किसी से मोहब्बत का ज़िक्र नहीं करते,जिसे पढ़ लिया दिल ने, वही सबक़ पुराना निकला।
चुनचुन यादव ✍️---------------


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
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