उमड़ते काले बादलों से,
बरसती रिमझिम बूंदे,
वृक्षों के हरे-हरे पत्तों ने,
पा कर स्पर्श मधुर,
किया उनका स्वागत,
जैसे प्रतीक्षारत हो,
पुनर्मिलन की आस में,
आज प्रतीक्षा पूर्ण हुई।
🖊️सुभाष कुमार यादव

Dastan-E-Shayara By Reena Kumari Prajapat

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The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
उमड़ते काले बादलों से,
बरसती रिमझिम बूंदे,
वृक्षों के हरे-हरे पत्तों ने,
पा कर स्पर्श मधुर,
किया उनका स्वागत,
जैसे प्रतीक्षारत हो,
पुनर्मिलन की आस में,
आज प्रतीक्षा पूर्ण हुई।
🖊️सुभाष कुमार यादव
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