हे पावस के प्रथम झकोरे!
जामुन की टहनियां झूम झूमकर
जैसी थकी -थकी जा रही
गगन चूमती शिखा -नीलगिरी की
अशक हो झूकी -झूकी जा रही
सोमपान किए नर्तकी - वृंद सी
साल - झूंड लहरा रही
धिन-थप -धिन -थप ताल सुरीली
बरगद की पत्तियां सुना रही
थकी नीम की डालियां कह रही
रूक जाओ अब थोरे!
हे पावस के प्रथम झकोरे!
श्याम -घटा से बूंद -बूंद जब
निकलें बनके फूहारें खूब
निचली -नभ में श्वेत -धूम्र की
उड़ने लगे गुबारें खूब
खिड़की द्वार से गृह प्रविष्ट हुए
शीतल समीर के आनंद खूब
मैदानों को सींच -सींचकर
कर दिए हरे धरांगन खूब
नदियों की धारा- धीमी जल जैसे
मन में मारे हिलोरें
हे पावस के प्रथम झकोरे!
गर्जन बदरी की सुन सुनकर
प्रिया का मन घबराए रही
देख देख बिजुरी की चमचम
डर जिगरां में समाए रही
पिया गयें हैं काम करन को
यादें उनकी सताए रही
उनके बिन अब नींद न आए
अब घर काटे जाए रही
अपनी पहली बरखा के संग
बुला दो साजन मोरे!
हे पावस के प्रथम झकोरे!!
सर्वाधिकार अधीन है


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
The Flower of Word by Vedvyas Mishra







