✨ वो ✨
सही–ग़लत का फर्क जो हर पल जानती है,
हर हाल में जो हमेशा सच का साथ देती है।
मस्ती के नाम पर भी उसने कभी,
ज़िंदगी में कोई ग़लत कदम नहीं उठाया।
सच–झूठ, अच्छाई–बुराई,
हर मोड़ पर उसने पहचानना सीखा है।
गलत और सही के बीच की लकीर,
उसने हर बार दिल से खींचा है।
किसे पता कोई इंसान खुद पर इतना काबू कैसे रख पाता है,
हर ख्वाहिश और हर ज़िद को खुद में समेट पाता है।
उसने अपने आप को हर पल संभाला,
शायद यही वजह है कि आज उसकी ज़िंदगी सजी-धजी है।
सच के रास्ते पर जो डटकर चलती है,
वही तो अंदर से सबसे मज़बूत होती हैं।
दीदी 💖
— Gitanjali ✍️


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
The Flower of Word by Vedvyas Mishra







