फक़्त चार दिन की इस ज़िंदगानी में ।
फ़ानी क़ायनात मेरी क्या होगी ।
मेरा होकर भी जब कुछ नहीं मेरा ,
जिस्म और रूह भी मेरी क्या होगी ।
डाॅ फौज़िया नसीम शाद

Dastan-E-Shayara By Reena Kumari Prajapat

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फक़्त चार दिन की इस ज़िंदगानी में ।
फ़ानी क़ायनात मेरी क्या होगी ।
मेरा होकर भी जब कुछ नहीं मेरा ,
जिस्म और रूह भी मेरी क्या होगी ।
डाॅ फौज़िया नसीम शाद
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