राहों के पत्थरों से
जब दिल ने आह भरी,
शब्दों ने चुप्पी साध ली
कि कहीं सभ्यता
असभ्य न हो जाए।
सहजता का दामन थाम लिया,
कि छुपा हुआ दर्द
चेहरे पर न उतर आए।
लबों पर मुस्कान सजा ली,
कि आँखों की नमी
कहीं दिखाई न दे जाए।
पर यह बावरा मन
दिल की गहराइयों में
रोष की परतें जमा करता रहा,
जो आखिरी साँस तक
फूलों से भरी राहों पर भी
पत्थरों का एहसास कराएगा।
वन्दना सूद
सर्वाधिकार अधीन है


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
The Flower of Word by Vedvyas Mishra







