तुझे नहीं आती नींद तो सपनों का क्या करेगी,
मुश्किलें आएंगी आएगी कहाँ जाएगी। ।
सोच मत इतना कि इतनी बातें कि पूरे दिन का क्या करेगी,
हवाएं बहेगी बहेगी तू साथ चलकर कहाँ जाएगी।
बाहों में मुकद्दर अपनी वजह से तेरे गले लगी है,
तेरे हाथ में सितारें नहीं ज़मीं पे है तू,
सारे जहां को समेटकर फिर तेरे हाथों का क्या करेगी,
खुशबू तो सभी की साँसों घुलेगी घुलेगी,
पर्दे में फूलों को छिपाकर कहाँ जाएगी।
होश तो है 'ललित' मोहब्बत ना हुई तो वो धोखे का भी क्या करेगी,
तेरे नाम पर दाग तो जिंदगी है जिंदगी है ख़ुदकुशी करके मौत भी कहाँ जाएगी। ।
- ललित दाधीच
- ललित दाधीच


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
The Flower of Word by Vedvyas Mishra







