जब तुम्हें गले लगाता हूँ,
तो सोचता हूँ किस हिस्से में रहूँ मैं तुम्हारे,
जरूरी हो जाता है तुमसे इश्क करना,
कहीं से भी टूटा नहीं हूँ,
जो तुम्हारे पास आता हूँ,
बस एक लम्हा तुम्हारे पास रह गया था,
उसे जीने आता हूँ,
वो लम्हा ही इतना गुज़रता रहा,
कि तुमसे ही मोहब्बत कर गया,
फिर तुम्हें चाहने के अलावा,
सबकुछ बेरंग सा, बेढंगा सा लगने लगा,
लगा कि मैं बंधन में हूँ,
तो बाकी जंहा बेकीमती लगने लगा,
जग से कब दूरी बढ़ने लगी,
तुम्हारे पास आने लगा,
ऐसा इश्क़ हो गया,
कभी इतना खो गया कि,
देखा मैं कहाँ कब तुमसे इश्क़ किया,
ये तो प्रेम बीच में है,
ये तुम्हारे करीब है,
तो तब तड़प होती कि इश्क भी हम दोनों के बीच है,
ये भी ना हो,
तो हम प्रमाणित प्रेम करते,
ये भी प्रेम ही है,
पर होने ना होने के बीच हम ये कर रहे हैं,
तो ये जोखिम प्रेम है,
तुम इसमें वज़ूद मत देखना,
वो तो हम दोनों से,
इसमे प्रेम देखना,
जो हम दोनों के मिलन को बताता है।
- ललित दाधीच


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
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