और तो क्या ही देखा है
तेरा रस्ता ही देखा है
तेरे जलवे, तेरे सपने
मैने इतना ही देखा है
मैंने तो नींदों में खुद की
तेरा सपना ही देखा है
आंखों में मैंने तेरी
अपना चेहरा ही देखा है
मैंने तो तेरी गलियों में
खुद को भटका ही देखा है
तेरे दामन से हां अक्सर
दिल को अटका ही देखा है
मैंने तो ख्वाबों में अपने
तेरा पहरा ही देखा है।
अनमोल


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
The Flower of Word by Vedvyas Mishra







