नींद आज भी नही आती।
खिड़की निहारते बीत जाती।।
छत की सतह की आकृतियाँ।
उभरती बिखरती नजर आती।।
कितनी बातेँ अधूरी रह गई।
अनकही बातेँ जैसे बुदबुदाती।।
स्मृतियों में आँसू बहने लगते।
पोंछत पोंछत मैं पस्त हो जाती।।
ग़ज़लों में जिये ज़माने बीत गए।
मन अचेत होता याद नही जाती।।
सोना मत सुनकर रक्त प्रवाह बढ़ता।
आँख लगने पर खुद को अपराधी पाती।।
तुम्हारे ख्वाब गढ़ने का अधिकार नही।
सिर दर्द में 'उपदेश' ग़ज़लें काम आती।।
- उपदेश कुमार शाक्यावार 'उपदेश'
गाजियाबाद


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
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