शुभ प्रभात की बेला बीत गई पर शुभ आचरण जरूरी है।
नववर्ष नवहर्ष की बगिया को सींचे पसीना कर्म जरूरी है।
अपने तन मन वाणी से मानवता झांके सदाचार जरूरी है।
मितव्यवी बनो सशक्त बनो व्यवहार में संस्कार जरूरी है।
सूर्य पूर्व से पश्चिम दिशा में आया तम को प्रकाश जरूरी है।
अशिक्षित अग्यानी नादान मानव को दिशा ज्ञान जरूरी है।
युवकों प्रौढ़ों को सहनशीलता आध्यात्मिक ज्ञान जरूरी है।
भारतमाता के वीर योद्धा भी स्वावलंबी सदाचारी जरूरी है।
कर्मवीर की धरती पर नववर्ष नवहर्ष की बगिया जरूरी है।
तलवार की धार तेज करले अब शंखनाद करना जरूरी है।
धर्म संस्कृति सभ्यता खतरे में हो तो सिंह दहाड़ जरूरी है।
मानवता हिसाब मांगती उपकार उपवास चेतना जरूरी है।
पर्यावरण जीव जंतु पशु पक्षी के जीवन की रक्षा जरूरी है।
आत्मघाती हमलों को अब रोको ताकत दिखाना जरूरी है।
सुंदर उपवन में नन्हे बच्चे खेले संस्कार मिलना जरूरी है।
कर्मयोगी तपोयोगी वीर योद्धा को दिशा उपदेश जरूरी है।
सत्यवीर वैष्णव बारां राजस्थान


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
The Flower of Word by Vedvyas Mishra







