दिल में हो रंजिश फिर भी उसे आम न करो
कभी किसी को रूसवा यूँ सरेआम न करो
तहज़ीब कहती है नफरतों को हवा न दो पर
यदि द्वेष गले लगा हीं लिए तो क़त्लेआम न करो

Dastan-E-Shayara By Reena Kumari Prajapat

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The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
दिल में हो रंजिश फिर भी उसे आम न करो
कभी किसी को रूसवा यूँ सरेआम न करो
तहज़ीब कहती है नफरतों को हवा न दो पर
यदि द्वेष गले लगा हीं लिए तो क़त्लेआम न करो
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