नौ महिने में नौ हजार दर्द सहती है,
लहू से अपने मां नया जीवन गढ़ती है,
रगों में जिसके रंग ममता का समाया है,
स्नेह -दरिया मां के आंखों से गुजरती है।।1।।
दिन में आफताब,रात में महताब होती है,
हमारी तरक्की ही जिनकी ख्वाब होती है,
मां भले ही एक अक्षर पढ़ना नहीं जानती,पर
वो हमारी जिंदगी की मुकम्मल किताब होती है।।2।।
बिना पैसे,घर चलाना कैसे, मां से पूछो,
भूखे पेट बच्चों को सुलाना कैसे, मां से पूछो,
पीड़ा मन की हो,तन की हो, जीवन की हो,
रो रोकर आंसू छिपाना कैसे, मां से पूछो।।3।।
यह रचना, रचनाकार के
सर्वाधिकार अधीन है
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The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
The Flower of Word by Vedvyas Mishra







