उसने मुड़-मुड़ के न मुझे देखा होता जाते-जाते
बदल न पाते फ़ैसला उसे खो ही देते पाते-पाते
मगर पा कर भी न हासिल हुआ कुछ
बहुत दूर हो गए हम क़रीब आते-आते
एक हीं रहगुज़र के हम दोनों थे राही मगर
सानेहा हो गए दोनों मंज़िल तक जाते-जाते

Dastan-E-Shayara By Reena Kumari Prajapat

Show your love with any amount — Keep Likhantu.com free, ad-free, and community-driven.
The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
उसने मुड़-मुड़ के न मुझे देखा होता जाते-जाते
बदल न पाते फ़ैसला उसे खो ही देते पाते-पाते
मगर पा कर भी न हासिल हुआ कुछ
बहुत दूर हो गए हम क़रीब आते-आते
एक हीं रहगुज़र के हम दोनों थे राही मगर
सानेहा हो गए दोनों मंज़िल तक जाते-जाते
© 2017 - 2026 लिखन्तु डॉट कॉम