लिपट कर ज़मीं से मैं सोया हूँ 'देव',
अमीरों ने समझा कि मुफ़्लिस-ए-राह हूँ।
फ़लक पर अमीरों का क़ब्ज़ा रहा है,
रही बे-क़ब्ज़ा ये ख़ाक, कि मुफ़्लिस-ए-राह हूँ।
ख़ुदाया! तेरी जन्नत में है ज़र-परस्ती,
सुकूँ ख़ाक में पाया कि मुफ़्लिस-ए-राह हूँ।
दुआ में भी माँगी अमीरों ने दौलत,
ख़ुदा को ही तो माँगा कि मुफ़्लिस-ए-राह हूँ।
जो गर्दूं पे उड़ते, वो गिरते भी देखे, 'देव'
डरूं अब मैं किस से कि मुफ़्लिस-ए-राह हूँ।


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
The Flower of Word by Vedvyas Mishra







