कभी कोई महंगा शौक पाला नहीं मैंने,
फिर भी लोग कहते मौज मस्ती में पैसे उड़ा रही मैं।
तन ढकने को सस्ते से कपड़े ढूंढती हूँ,
सजना सॅंवरना होता क्या मालूम नहीं मुझे ये।
बस दो वक्त की दाल रोटी के सिवा कुछ खाती नहीं,
तरकारियां होती क्या मुझे ये मालूम नहीं।
हां तबीयत ठीक नहीं रहती मेरी
खर्चा दवाईयों में ज़्यादा होता है,
मेरे इसी इलाज़ को लोग मौज मस्ती कहते हैं।
जिसकी जैसी मानसिकता बातें वो वैसी ही करेगा,
पर दवाईयां भी असर करती नहीं तो
दवाईयां लेनी भी अब छोड़ दी मैंने।
आज बहुत परेशानी हो रही मुझे
आज फिर मेरी बीमारी बवाल मचा रही है,
चैन पड़ रहा नहीं मुझे तकलीफ़ इतनी जो सता रही है।
🖋️ रीना कुमारी प्रजापत🖋️
सर्वाधिकार अधीन है


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
The Flower of Word by Vedvyas Mishra







