कविता: मोबाइल की दुनिया
दिनांक:21/05/2026
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मोबाइल की दुनिया ने ऐसा चमत्कार दिखाया है।
मोबाइल की आदत ने इंसान को पागल बनाया है।
मोबाइल चलाकर सबको बड़ा होशियार बनाया है।
सोच समझ कर उपयोग में लेना समझ में आया है।
अच्छी तरह समझने वालो ने भी धोखा खाया है।
किसी ने नींद किसी ने चेन व समय गंवाया है।
घड़ी थिएटर सिनेमा मालिक ने होश गंवाया है।
रोजमर्रा की जिंदगी में सबको पागल बनाया है।
कैलकुलेटर टेपरिकॉर्डर का व्यवसाय घटाया है।
पोस्ट ऑफिस की चिट्ठी पत्री को भुलाया है।
नेत्र हार्ट बच्चों को मानसिक रोगी बनाया है।
रोना चीखना गुस्सा करना बच्चों को सिखाया है।
बच्चों ने पढ़ने के बहाने मोबाइल चलाया है।
विद्यालय कॉलेज लाइब्रेरी को व्यर्थ बताया है।
साइबर क्राइम ठगी अश्लीलता को बढ़ाया है।
मेल मिलाप रिश्तों में दूरियां एकांत आलस्य लाया है।
मोबाइल की दुनिया ने ऐसा चमत्कार दिखाया है।
मोबाइल की आदत ने इंसान को पागल बनाया है।
सत्यवीर वैष्णव बारां राजस्थान 💞✒️✒️💞


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
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