उसके आँखो में आँसू ऐसे नही आते।
अन्दर में हूक उठने पर रुक नही पाते।।
हर कश्ती का अपना तजुर्बा दरिया में।
किनारे बैठकर मंजधार दुख नही पाते।।
भंवर में आओगे तब समझोगे 'उपदेश'।
वहाँ पर दांव-पेंच कोई काम नही आते।।

Dastan-E-Shayara By Reena Kumari Prajapat

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The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
उसके आँखो में आँसू ऐसे नही आते।
अन्दर में हूक उठने पर रुक नही पाते।।
हर कश्ती का अपना तजुर्बा दरिया में।
किनारे बैठकर मंजधार दुख नही पाते।।
भंवर में आओगे तब समझोगे 'उपदेश'।
वहाँ पर दांव-पेंच कोई काम नही आते।।
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