लगन लगाने के बहुत तरीके हैं,
तुमसे मिलने की बात कुछ और है,
लगन लगाने के बहुत तरीके हैं,
तुमसे मिलने की बात कुछ और है,
सागर की रेखा में किनारे नहीं है,
मिलने की तड़प है ये बहाने नहीं,
बातों में भिगो ना सपनों की छत पे,
ख्वाबों से देखो ना हकीकत के रिश्ते,
बादल भी सूना है बारिश के मौसम में,
राहों का मिलना तय है नसीबों के पीछे,
अपना मिलन भी थोड़े के बीच में है,
ये खबर पाकर तुम्हें असर होगा,,
लगन लगाने के बहुत तरीके हैं,
तुमसे मिलने की बात कुछ और है,,
सालभर का रिश्ता ये कोई मिलना नहीं है,
सालों की मेहनत का ये कोई नतीजा नहीं है,
तुमको छुपना हो अगर पिया के बहाने से,
पिया को बुलाने कहाँ तक जाओगे,
सारे शहर की नजदीकियों से,
दूर है पिया, किस शहर को जाओगे,
ये मेरा ही ख्यालों का समन्दर है,
ये मेरा ही ध्यान, साँसों का घर है,,
ये उनसे मिलना कितना अजीब है,
ये उनके बिना क्या उनकी हकीकत है,
मैं उनको किस तरह उनका बताता,
जो जो जोड़ा मेरी नजर से मैंने,
उनको कैसे अपना भीतर बना लू,
इतने सवालों क्या जवाब होगा,
उनसे मिलना कब समंदर होगा,,
लगन लगाने के बहुत तरीके हैं,
उनसे मिलने की बात कुछ और है
कुछ और है,
कुछ और है। ।
- ललित दाधीच


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
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