तुम्हारी इन आँखों में आँसू देखें है हमने,
इन आँखों को भी अब हँसाना सीखों,
जिनके पास मोहब्बत थी,
वो ठहर भी जाते थे,
पर जिन्होंने रात दिन मोहब्बत सिर्फ काटी है,
सिर्फ बहानों से भरे थे,
उन्होंने रास्ते पार किए,
कठिन रास्ते,
टेढ़े मेढे,
इसलिए अब,
अपनी आँखों में अब तुम रहो,
और इन आँखों में तुम रहना सीखों,
इन आँखों को दरिया नहीं बनाना है,
और नाही झरना बनने दो,
इनमें स्वतः मत होने दो,
इन्हें सिर्फ हँसाओं,
इन्हें सिर्फ तुम्हें देखने दो,
चेहरे के सामने आईना नहीं,
अपनी इन्हीं आँखों रखो,
इन्हीं आँखों से देखों।
- ललित दाधीच।


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
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