लौट गए सब झूठे, आ कर सच के मोड़ में,
सब खो कर क्या मिलेगा इस झूठी होड़ में।
मैं गलत को गलत कह, गलत साबित हुआ,
झूठ वाले लगे हैं झूठे सच की जोड़-तोड़ में।
दर्द-ओ-ग़म सह, बचा लिया किरदार अपना,
जो गलत है उसके साथ नहीं मैं गठजोड़ में।
हैं मुझमें भी बुराइयाँ, आखिर हूँ एक इंसान,
पर मैं शामिल नहीं हूँ अंधों की इस दौड़ में।
आस्तीन के साँपों से तो खुदा बचाए सबको,
अपना रिश्ता तोड़, लगे हैं बस तोड़-जोड़ में।
🖊️सुभाष कुमार यादव


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
The Flower of Word by Vedvyas Mishra







