पांवों में कांटें चुभा जातें हैं, कुछ अपने लोग,
दिल को यूं ही,जला जातें हैं, कुछ अपने लोग,
हमारा हंसना,मुस्कुराना, शायद उन्हें पसंद नहीं,
हमें रूलाकर मुस्करा जातें हैं, कुछ अपने लोग।
गिनती में हम जिन्हें खुद से आगे रखना चाहते हैं,
हजारों खामियां ही गिना जातें हैं, कुछ अपने लोग।
बंधवाते हैं जिनके सर, सम्मान की पगड़ी हम,
हमारी पगड़ी ही गिरा जातें हैं, कुछ अपने लोग।
जिनकी खुशहाली की दुआएं, मांगते हैं खुदा से ,
बद्दुआओं का ताज सजा जातें हैं, कुछ अपने लोग।
यह रचना, रचनाकार के
सर्वाधिकार अधीन है
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The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
The Flower of Word by Vedvyas Mishra







