शेर की दहाड़ से जंगल हिलता है
हिंद की दहाड़ से संसार हिलता है
वीरों की दहाड़ से अंबर हिलता है
प्रताप की दहाड़ से अकबर हिला था
शिवा के दहाड़ से औरंगजेब हिला था
बागी बलिया की दहाड़ से दिल्ली हिलती है
बागी बैरिया की दहाड़ से दिल्ली हिलती है
आजाद के दहाड़ से अंग्रेजी सत्ता हिली थी
साहस से अंततः आजादी हमें मिली थी
सुलगी हुई है क्रांति की चिंगारी
रुकना सीखे नहीं हम क्रांति कारी
हैं हम गंगा के किनारे के वीर
बदल देंगे हम देश की तस्वीर
बदल देंगे हम सरकार को
बदल देंगे हम संसार को
चम चम चमक रही हैं तलवारें
कहां शत्रु है बोलो,किसको मारें?
पूछ रही हैं हमारी नंगी तलवारें
एक जुट होकर हम भारत मां को संवारें।
गुदरी सिंह के टोला, पांडे पुर, बैरिया, बलिया, उत्तरप्रदेश


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
The Flower of Word by Vedvyas Mishra







