अब ग़म है न खुशी, कि वो अहबाब थे मेरे..
क्यूँ आँखों में नींद नहीं, कैसे वो ख़्वाब थे मेरे..।
सुनता नहीं ये ज़माना, दिल-ए-ख़्वाहिश कोई..
शोर-ओ-गुल के सवाल थे, और ख़ामोश ज़वाब थे मेरे..।
इन अँधेरों से किस तरह निकलूंगा कोई बताए मुझे..
अब वो वक्त नहीं, कि जब दोनों हाथों में आफ़ताब थे मेरे..।
मैं यूं ही गफलतों की चाल, चलता रहा उम्रभर..
सोचा ही न था, खुदा की बही में हिसाब थे मेरे..।
बागबां करता है जिक्र, चमन की खुशबुओं का..
वो क्या जाने, गुलों से ज़ियादा काँटे इंतिख़ाब थे मेरे..।
पवन कुमार क्षितिज


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
The Flower of Word by Vedvyas Mishra







