मुरझाए हुए फूल भी, इक ख़ुशबू देंगे यारा..
यादें तो दर्द देंगी, और ख़्वाब आंसू देंगे यारा..।
तुम तो चले ही जाओगे, मुंह मोड़ के इक दिन..
मगर वफ़ा-ए-कदम, लौटने की जुस्तजू देंगे यारा..।
मैने हाथों को फैलाया, तेरे दामन-ए-साए तक..
तुमने ग़र न ख़्याल किया, तो ज़िस्म-ए- रूह छू देंगे यारा..।
अबकी बारिश में गुलों पे, जो रंगत-ए-रवाँ न आई..
भँवरे जज़्बात लिए हैं, कि हम रंग-ए-लहू देंगे यारा..।
ये ज़माना तो देखना, हम पर और भी इल्ज़ाम लगाएगा..
मगर हम सबूत-ए-बेगुनाही मुंसिफ-ए-दिल के रूबरू देंगे यारा..।
पवन कुमार "क्षितिज"


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
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