"अरेराज की धरती"
अरेराज की धरती, ऐतिहासिक और धार्मिक स्थल,
सोमेश्वर नाथ महादेव, शिवलिंग का है मुक्कल।
पंचमुखी शिवलिंग, प्राचीन और पवित्र स्थल,
सावन में आते हैं, श्रद्धालु दूर-दूर से मिल।
सोमेश्वर नाथ महादेव, हैं भोले का रूप,
जिनकी पूजा से, मिलता है सबका कूप।
शिवरात्रि और सावन, में यहाँ मेला लगता,
जहाँ श्रद्धालुओं का, लगता है जमावड़ा।
सोमेश्वर नाथ महादेव, हैं शांति का संगम,
जहाँ आकर मन को, मिलता है नया जीवन।
यहाँ की घंटियाँ, बजती हैं हर पल,
सोमेश्वर नाथ महादेव, का है यह है मुक्कल।
अशोक स्तंभ की है, ऐतिहासिक कहानी,
सम्राट अशोक ने, बनवाया था इसे पानी।
धर्मलेख अंकित है, 41 पंक्तियों में,
बताता है हमें, मौर्यकाल की कहानी।
यह स्तंभ है गवाह, अशोक के धर्म का,
जिसने फैलाया था, प्रेम और कर्म का।
अशोक स्तंभ की, है वाणी अनमोल,
जिसने सिखाया है, हमें सत्य और धर्म का बोल।
गंडक नदी के किनारे, बसा है अरेराज,
एक अनुमंडल मुख्यालय, जो है सबका साज।
सोमेश्वर नाथ मंदिर, परिसर में है तालाब,
सुंदरता बढ़ाता है, इस स्थल का सौंदर्य ।
यहाँ की वादियाँ, हैं शांति का है संगम,
जहाँ आकर मन को, मिलता है नया जीवन।
गंडक नदी की, है धारा शुद्ध और पवित्र,
जिसमें स्नान करके, मन को मिलता है है मुक्ति।
लौरिया नंदनगढ़ का, अशोक स्तंभ है पास,
केसरिया स्तूप भी, है यहाँ का इतिहास।
बिहार की काशी, है अरेराज का नाम,
यहाँ की मिट्टी, है पवित्र और गौरवशाली,
जहाँ आकर श्रद्धालु, लेते हैं आशीष प्यार से।
लौरिया नंदनगढ़, है एक पवित्र स्थल,
जहाँ आकर मन को, मिलता है शांति का फल।
शैव परंपरा का, है यह पवित्र स्थल,
पुरातात्विक केंद्र, है इसका है मुक्कल।
सम्राट अशोक के, शासनकाल की कहानी,
बताता है हमें, अरेराज की यह वाणी।
यहाँ की संस्कृति, है विविध और अनमोल,
जहाँ आकर मन को, मिलता है एक नया मोल।
शैव परंपरा की, है यह धरोहर पवित्र,
जिसे सजाते हैं, हम सब मिलकर नित्य।
जलपा मंदिर भी, है यहाँ का एक प्रमुख आकर्षण।
अरेराज की धरती, है ऐतिहासिक और धार्मिक स्थल,
सोमेश्वर नाथ महादेव, शिवलिंग का है मुक्कल।
यहाँ आकर मन को, मिलता है शांति,
अरेराज की धरती, है सबकी है भक्ति।
अरेराज की धरती, है पवित्र और गौरवशाली,
जहाँ आकर श्रद्धालु, लेते हैं आशीष प्यार से।
यहाँ की वादियाँ, हैं शांति का है संगम,
जहाँ आकर मन को, मिलता है नया जीवन।
रचनाकार- पल्लवी श्रीवास्तव
ममरखा, अरेराज, पूर्वी चम्पारण (बिहार )


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
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