Dastan-E-Shayara By Reena Kumari Prajapat

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The Flower of WordThe Flower of Word by Vedvyas Mishra
The Flower of WordThe novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
The Flower of Word by Vedvyas MishraThe Flower of Word by Vedvyas Mishra
Dastan-E-Shayara By Reena Kumari Prajapat

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The novel 'Nevla' (The Mongoose), written by Vedvyas Mishra, presents a fierce character—Mangus Mama (Uncle Mongoose)—to highlight that the root cause of crime lies in the lack of willpower to properly uphold moral, judicial, and political systems...The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra

कविता की खुँटी

                    

खुशबू की तरह न आना

जब भी तुम करीब आओ, तो,
खुशबू की तरह न आना,
नहीं चाहता कि, सांसों को छूकर,
तुम कहीं, हवाओं में बिखर जाओ!

कभी ,कभी, कभी भी,
सपनों में नहीं आना,
जब नींद टूट जाए तो,
नहीं चाहता कि, तुम,
आंखों से ओझल हो जाओ!

चांदनी की तरह आने से क्या होगा?
कुछ प्रहर रात्रि के बीत जाएंगे,
फिर वही धूप, वही अकेलापन,
फिर से वही नीरस लम्हें,

तुम जब भी आओ, तो,
एक हादसा बनकर, एक घाव बनकर,
बेइंतहा दर्द बनकर, कि,
जब तक जिंदा रहूँ, मेरे दिल में
तुम रहो, कभी न जाने वाली यादों की तरह!

कभी घटा बनकर, छटा बनकर,
सावन बनकर, मनभावन बनकर,
सुनहरी सुबह बनकर, शबनम बनकर,
फूल बनकर, गीत बनकर
कभी, कभी ,कभी न आना
हाँ, आओ तो, मेरा साया बनकर!


यह रचना, रचनाकार के
सर्वाधिकार अधीन है


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रचना के बारे में पाठकों की समीक्षाएं (3)

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ममता तिवारी said

सुनहरी सुबह बनकर, शबनम बनकर
फूल बनकर, गीत बनकर ....... वाह बहुत सुंदर रचना काबिले तारीफ अति उत्तम लाजवाब काफी सुंदर बेहतरीन बेहतरीन लाजवाब बहुत सुंदर सादर प्रणाम आपको 🙏🙏👌👌

सरिता पाठक said

बहुत सुन्दर रचना हर पंक्ति लाजवाब ह्रदयस्पर्शी रचना भईया जी आपकी हर रचना उच्चकोटि की होती है ह्रदय को छू लेती है आपको सादर प्रणाम 🙏

देवनन्दन कुमार, "बरहथिया" said

अत्यन्त सुन्दर रचना है सर। आप तो गजब लिखते हैं।

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