ना कोई बात,
ना कोई बात का मतलब,
बिना बात खो दी है मैंने अपनी,
बरसों की कमाई इज़्ज़त।
अपने मन में पाले हैं लोग,
कई वहम मुझको लेकर,
कुछ कहते हैं अपना बन लूट रही,
कुछ कहते हैं दूसरों की दौलत से
मजे छान रही।
गलती क्या है मेरी,
शायद कोई बता दे मुझे,
अपना समझ सहायता ली ये?
या मेरी तक़दीर जो ऐसी
लिखा कर लाई मैं।
सुना था कि
खुली किताब मत बनना कभी,
जो सुना था उसे अनसुना किया...
गलती है मेरी बस यही।
जिसे भी अपना समझा,
सारे राज़ बता दिए,
और बताए जिसे,
उसने दी एक ऐसी उपाधि,
जो मेरे लिए ना कभी थी,
ना कभी है, ना कभी होगी।
खुद को बहुत समझदार
बताते थे लोग,
तरह - तरह की सलाह देते थे,
पर जो इल्ज़ाम लगाया
मुझपे लोगों ने,
समझ आया कि वो कितने पानी में हैं।
कितने ही भ्रम मिटाने हैं मुझे,
कितने ही कर्ज चुकाने हैं,
दे ऐ मेरे खुदा साथ मेरा,
कब से ही हर किसी का
हर कर्ज़ चुकाना चाहती हूॅं मैं।
✍️ रीना कुमारी प्रजापत 'मनस्वी'✍️
सर्वाधिकार अधीन है


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
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