ख़ामोशी का आगमन: नींद की आपबीती
मैं वो साया हूँ जो हर रात दरवाज़ा खटखटाता हूँ, मैं अल्फाज़ नहीं लाती, बस रूह को ठहराती हूँ।
तुम मुझे आराम समझते हो, मैं इक सफ़र होती हूँ, जहाँ ज़िंदगी के हिसाब नहीं, बस ख़ुद से मुलाक़ात होती है।
वो बेचैनी जो दिन भर तुमको थकाती रही, मैं चुपके से आकर उसे क़र्ज़ से छुड़ाती हूँ।
कोई फ़ैसला नहीं करती, न कोई सवाल पूछती हूँ, बस तुम्हारी आँखों की रोशनी को थोड़ा आराम देती हूँ।
ये अंधेरा मेरा साथी है, ये ख़ामोशी मेरा लिबास, ताकि तुम बाहर के शोर से टूटकर भीतर जुड़ सको।
मैं कल के लिए तुम्हारे ज़ेहन की मिट्टी साफ़ करती हूँ, ताकि तुम फिर से नये ख्वाबों के बीज बो सको।
मैं नहीं चाहती कि तुम मुझे याद रखो अगले दिन भी, बस इतना जान लो कि मैं ज़रूरी हूँ, दिखावा नहीं करती हूँ।
जब तुम गहरी होते हो, तब अस्ल में तुम ख़ुद में जागते हो, मैं तुम्हारे वजूद को इक अधूरापन देकर जाती हूँ।
मैं नींद हूँ, मैं बस आकर गुज़र जाती हूँ।
- ललित दाधीच


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
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