दर्द अपना छिपाते रहे शायद कुछ विचारकर।
मौसम ने अंगड़ाई ले ली बरसात को छोड़कर।।
अन्दर तक भीगने पर बताया किसी को नही।
मुझसे सब कह दिया थोड़ी बहुत शर्त रखकर।।
कानो के माध्यम से महसूस करती आँखों ने।
पलके सम्भाले रखी खुशी से नाता जोड़कर।।
मीठी मीठी बातों में महक जरा सुकून की आई।
मुस्कराना जारी रखा अपनी ख्वाहिशें छोड़कर।।
प्रगति पथ पर अग्रषित होना सही है 'उपदेश'।
उत्साहित करते रहे बड़ी खामोशी से सुनकर।।
- उपदेश कुमार शाक्यावार 'उपदेश'
गाजियाबाद


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
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