दिलों में दूरी है दूरी का क्या करें,
ज़िन्दगी जो बसी है हम में इस ज़िन्दगी का क्या करें।
हाथ लगा लेंगे कोशिशों को पर,
इस नसीब का क्या करें,
शुरू से आख़िर तक,कोई अपना नहीं बनता है,
ख़ुद ही को अपना बनाना है फिर अपनों का क्या करें।
ख़ुद से ही समझना का हर कारवाँ को मोड़ को,
फिर चलते-चलते इन क़दमों का क्या करें।
दुनिया में कुछ जीतना है या जीना है,
खाली इंसान अपने ख्यालों का क्या करें,
जो भी मिला करता है चला जाता है हाथ से,
फिर खाली होने पर भरने का क्या करें।
कोई दोस्त है कोई इश्क़ है,
फिर इस खाली इंसान का क्या करें।
- ललित दाधीच


The Flower of Word by Vedvyas Mishra
The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
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