Dastan-E-Shayara By Reena Kumari Prajapat

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The Flower of WordThe Flower of Word by Vedvyas Mishra
The Flower of WordThe novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra
The Flower of Word by Vedvyas MishraThe Flower of Word by Vedvyas Mishra
Dastan-E-Shayara By Reena Kumari Prajapat

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The novel 'Nevla' (The Mongoose), written by Vedvyas Mishra, presents a fierce character—Mangus Mama (Uncle Mongoose)—to highlight that the root cause of crime lies in the lack of willpower to properly uphold moral, judicial, and political systems...The novel 'Nevla' (The Mongoose) by Vedvyas Mishra

कविता की खुँटी

                    

कहाँ भागकर जायँगे अपनों के तानो सें तंग आकर के

मेरा क्या हैं कुछ नहीं मेरा ये नाम-खानदान भी उनका
पैरो तले कुचल दिया और मानूँ ये अहसान भी उनका

पहचान भी उनकी ज़ात भी उनकी सम्मान भी उनका
औरत होने के नाते मेरे नाम का कन्यादान भी उनका

सोचा कि बगावत करलु अपनों सें और अपने आप सें
फिर याद आया मेरा धर्म भी उनका मशान भी उनका

कहाँ भागकर जायँगे अपनों के तानो सें तंग आकर के
घर के बाहर की ज़मीं भी उनकी आसमान भी उनका

शिकायत क्या करे और किससे करे ये बता ऐ आईना
ज़िस्म का लहु भी उनका ये ज़िस्मि मकान भी उनका

कृष्णा का वजूद तों जैसे मुट्ठीभर रेत सें भी गया गुजरा
कैसे जीना हैं कब तलक़ जीना हैं ये फरमान भी उनका
-कृष्णा शर्मा




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रचना के बारे में पाठकों की समीक्षाएं (4)

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Lekhram Yadav said

ये तिरस्कार भी उनका ये जहान भी उनका
जीने की वजह भी उनकी सामान भी उनका
क्या ऐसे ही घुट-घुट कर मरते रहोगे जमाने में
जिन्दगी यूंही न गुजरेगी क्या ये आत्म सम्मान भी उनका
बहुत खूबसूरत और दिल को मायूस कर देने वाली एक खूबसूरत और लाजवाब रचना, आपको सादर नमस्कार।

कृष्णा शर्मा replied

बहुत-बहुत शुक्रिया 🙏😊
सादर प्रणाम ☺️🙏

मनोज कुमार सोनवानी "समदिल" said

अपनों से मिली पीड़ा का अंतर्विरोध,पर, कुछ न कर पाने की लाचारी,बस, यही तो है जिंदगी की बीमारी। हृदयस्पर्शी कविता 👌🙏🙏

कृष्णा शर्मा replied

बहुत-बहुत शुक्रिया 🙏😊
सादर प्रणाम ☺️🙏

पवन कुमार "क्षितिज" said

ये सिर्फ़ कवि की कल्पना ही है, असलियत में तो ऐसा कुछ ज़िंदगी में नहीं गुज़र रहा ना..मन की टीस को अच्छे शब्दों में बाँधा है कृष्ण जी..👌👌

कृष्णा शर्मा replied

बहुत-बहुत शुक्रिया 🙏😊
सादर प्रणाम ☺️🙏

सुप्रिया साहू said

एहसान मानने के सिवा और कर भी क्या सकते हैं उन्होंने आवाज़ उठाई उन्हें तो जमीन में कुचल दिया गया, बहुत खूबसूरत रचना मैम 👌🏻👌🏻, आपको सादर प्रणाम 🙏🏻🙏🏻।

कृष्णा शर्मा replied

बहुत-बहुत शुक्रिया 🙏😊
सादर प्रणाम ☺️🙏

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